मैं भूल गया कि मैं क्या हूँ .....
या शायद ये मुझे कभी पता ही नहीं था
खैर,जो भी रहा हो
अभी का तो सच यही है
की मुझे नहीं पता की मैं क्या हूँ
या यूं कहा जाना चाहिए की ,
मुझे नहीं पता की मैं 'क्यों' हूँ
क्या सिर्फ इसलिए की मेरा जन्म हुआ है
और सबकी तरह मुझे भी जीना है
पर फिर सबका जीना भी एक जैसा कहाँ होता है,
कोई मर मर के जीता है
कोई जीते-जी मर जाता है
और कोई ऐसा भी होता है जो की
मरने से पहले ऐसा कुछ कर जाता है
की लगता है कि,हाँ
उसका जीना बस उसी एक चीज़ के लिए था
पर सवाल फिर वहीँ रह जाता है
कि मेरा जीना किसके लिए है
और क्या अभी तक जो उम्र काटी है
वो जीना था ,या फिर उम्र ने मुझे काटा है
मुझे सच में पता नहीं की इतने बरसों में मैं कभी जिया था
मैं सच में भूल गया हूँ
या शायद मैं कभी जिया ही नहीं|
या शायद ये मुझे कभी पता ही नहीं था
खैर,जो भी रहा हो
अभी का तो सच यही है
की मुझे नहीं पता की मैं क्या हूँ
या यूं कहा जाना चाहिए की ,
मुझे नहीं पता की मैं 'क्यों' हूँ
क्या सिर्फ इसलिए की मेरा जन्म हुआ है
और सबकी तरह मुझे भी जीना है
पर फिर सबका जीना भी एक जैसा कहाँ होता है,
कोई मर मर के जीता है
कोई जीते-जी मर जाता है
और कोई ऐसा भी होता है जो की
मरने से पहले ऐसा कुछ कर जाता है
की लगता है कि,हाँ
उसका जीना बस उसी एक चीज़ के लिए था
पर सवाल फिर वहीँ रह जाता है
कि मेरा जीना किसके लिए है
और क्या अभी तक जो उम्र काटी है
वो जीना था ,या फिर उम्र ने मुझे काटा है
मुझे सच में पता नहीं की इतने बरसों में मैं कभी जिया था
मैं सच में भूल गया हूँ
या शायद मैं कभी जिया ही नहीं|


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